दरिया (dariya)

Sunday, January 09, 2005

 

सद्वचन

आलस्यं हि मनुष्याणां शरीरस्थो महारिपुः |
न हि सुप्तस्य सिंहस्य प्रविशन्ति मुखे मृगाः||


अयंनिजोपरंवेति गणनालघुचेतसाम्|
महात्मनांतुवसुधैवकुटुम्बम्||



असितगिरिसमं स्यात् कज्जलं सिन्धुपात्रे |
सुरतरुवर शाखा लेखनी पत्रमुर्वी ||
लिखति यदि गृहीत्वा शारदा सर्वकालं|
तदपि तव गुणानाम् ईशपारं न याति ||

Comments:
हिंदी में लिखते हो, उर्दू और संस्कृत में भी लिखते हो| कमाल है !
 
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