tag:blogger.com,1999:blog-10058766.post-1143500676464148152006-03-27T14:39:00.000-08:002006-11-11T20:05:07.280-08:00अविस्मरणीय..भारतेन्दु का लिखा ये टुकड़ा आज भी अक्षरशः सत्य है.<br /><br />तीन बुलाये तेरह आवें <br />निज निज विपदा रोई सुनावें <br />आँखों फूटे भरा न पाये <br />क्यों सखी साजन? नहीं! ग्रैजुएट..Anuraghttp://www.blogger.com/profile/11984538289882278685noreply@blogger.com